नोएडा, 10 अगस्त 2026। सावन के दूसरे सोमवार पर नोएडा के सेक्टर-73 में फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के विशेष बच्चों ने कांवड़ यात्रियों का स्वागत कर सेवा और श्रद्धा की मिसाल पेश की। बच्चों ने अपने हाथों से तैयार किए गए उपहार कांवड़ियों को भेंट किए और उनके साथ कांवड़ यात्रा के अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम के दौरान फर्स्टवन रिहैब के बच्चों की मुलाकात कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं से हुई। आयोजकों के अनुसार, कई बच्चों के लिए यह पहला अवसर था जब उन्होंने कांवड़ियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनसे बातचीत की।
201 लीटर गंगाजल लेकर यात्रा कर रहे बॉबी यादव से भी मिले बच्चे
कार्यक्रम के दौरान बच्चों की मुलाकात 201 लीटर गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा कर रहे बॉबी यादव से भी हुई। बॉबी यादव और अन्य कांवड़ यात्रियों ने बच्चों से बातचीत करते हुए कांवड़ यात्रा की प्रक्रिया, सावन के धार्मिक महत्व और भगवान शिव से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानकारी साझा की।
कांवड़ यात्रियों की बातें सुनकर बच्चे उत्साहित नजर आए। बातचीत के दौरान बच्चों ने कांवड़ यात्रा से जुड़े अनुभवों और आध्यात्मिक पहलुओं को समझने में रुचि दिखाई।
बच्चों ने हाथ से बने उपहार देकर किया सम्मान
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के बच्चों ने कांवड़ियों के लिए अपने हाथों से हैंडवॉश, सम्मान पत्र और भगवान महादेव की मिट्टी से तैयार कलाकृति बनाई थी। बच्चों ने ये उपहार कांवड़ यात्रियों को भेंट कर उनका सम्मान किया।
फाउंडेशन के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष बच्चों में सेवा, श्रद्धा, सामाजिक सहभागिता और भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देना था।
फर्स्टवन रिहैब की टीम रही मौजूद
कार्यक्रम में फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉ. महिपाल सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, CEO डॉ. सुष्मिता भाटी, एडमिन हेड कृष्णा यादव, स्पेशल एजुकेटर इलिका रावत और फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह मौजूद रहे।
कार्यक्रम में स्नेहा पुरी, ग्रंथ गुप्ता, वंश, सानवी सिन्हा, राजवी सिंह, राघवी सिंह और आरव सिंह सहित कई बच्चों ने हिस्सा लिया।
वहीं दीपक सिंह, भावना सोनी, गौरी पुरी, सुनीता भाटी, अनाया सिंह, भाविका चौहान, रजत शर्मा और रितेश सिन्हा ने वॉलंटियर के रूप में आयोजन में सहयोग किया।
समाज से सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने की अपील
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने समाज के संस्थानों और नागरिकों से अपील की कि वे भी कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं के साथ ऐसे आयोजनों में शामिल हों, जिनसे बच्चों और समाज के अन्य वर्गों को भारतीय संस्कृति, सामाजिक सेवा और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ने का अवसर मिले।
कार्यक्रम के जरिए विशेष बच्चों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सेवा और सामाजिक सहभागिता में किसी भी व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।


